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“जब तक संगीत जीवित है, दीदी जीवित हैं।” — पं. ह्रदयनाथ मंगेशकर

 “जब तक संगीत जीवित है, दीदी जीवित हैं।” — पं. ह्रदयनाथ मंगेशकर ने लता मंगेशकर की ९६वीं जयंती पर दिदी पुरस्कार समारोह का नेतृत्व किया



भारत रत्न लता मंगेशकर, जिन्हें प्यार से दीदी कहा जाता है, की ९६वीं जयंती के अवसर पर यशवंतराव चव्हाण नाट्यगृह, कोथरूड, पुणे में भव्य दिदी पुरस्कार समारोह आयोजित हुआ। शिरीष थिएटर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में संगीत जगत के दिग्गज और सांस्कृतिक हस्तियाँ एकत्र हुईं।



प्रख्यात गायिका माधुरा दातार को इस वर्ष दिदी पुरस्कार से सम्मानित किया गया और यह पुरस्कार आशिष शेलार द्वारा प्रदान किया गया।

पं. ह्रदयनाथ मंगेशकर ने लता दीदी के जीवन की कुछ अनसुनी और निजी यादें साझा कीं और कहा, “जब तक आवाज़ है, स्वर है, संगीत है, करुणा है, तब तक वह रहेंगी — और यही कारण है कि वह मेरी बड़ी बहन हैं।”



आशिष शेलार ने कहा, “लता दीदी का संगीत अमर है। वह भारत की आत्मा की आवाज़ थीं। दिदी पुरस्कार जैसे आयोजन उनकी स्मृति को सजीव रखते हैं और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं।”


पुरस्कार ग्रहण करते हुए माधुरा दातार ने कहा, “दिदी पुरस्कार पाना मेरे संगीत जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। लता दीदी के नाम से यह पुरस्कार मिलना मेरे लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण है। मैं उनके संगीत की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहूँगी।”



संध्या का मुख्य आकर्षण हिंदी–मराठी संगीतमय कार्यक्रम “मी लता दीनानाथ…” रहा, जिसमें माधुरा दातार, मनीषा निश्चल और विभावरी जोशी ने लता दीदी को सुरों की भेंट दी।

विशिष्ट अतिथियों में सुशील कुलकर्णी, मोहन जोशी, प्राजक्ता माली और सांसद मेधा कुलकर्णी उपस्थित रहे।


यह समारोह पुणे की सबसे भावपूर्ण सांस्कृतिक संध्याओं में से एक साबित हुआ और यह दर्शाया कि भले ही उनकी आवाज़ अब मौन हो गई है, मगर दीदी की आत्मा हर सुर में जीवित है।

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